Raw Thoughts For Poems

ज्योँ दूर रह रह क्र हम को सताना कोई तुमसे सीखे

ऊपर से ज्यों दाँत निकालना

छुप छुप कर आंसू बहाना कोई तुमसे सीखे।

इच्छा तो तुम भी रखते हो हमसे मिलने की

पर कभी पास ना आना कोई तुमसे सीखे।

दिल रखने के लिए मुसकुरा देते हो दूर से

दूर रहने का रोज़ नया बहाना कोई तुमसे सीखे।

ज़िंदगी के हर दुःख को आसानी से झेल जाते हो

दूसरोँ के दिल टूटने से बचाना कोई तुमसे सीखे।

चल इतना ही बहुत है जीने के लिए

यह कह कर खुद को सनझाना कोई तुमसे सीखे।

सीखने के लिए कितना कुछ है तुम्हारे पास

हमारे पास कया है यह जान पाना कोई तुमसे सीखे।

चल हट पगला खाली बातेँ बनाता है

यह कह कर दूर भाग जाना कोई तुमसे सीखे।

पास कभी आते नहीं बात कभी करते नहीं

दूर रह रह कर प्यार जताना कोई तुमसे सीखे।

दोसतो को इतना आसानी से जाने देते हो

फिर दिल में उनकी यादेँ वसाना कोई तुमसे सीखे।

कभी दूर ना जाने का वायदा कर के

फिर कभी वापस ना आना कोई तुमसे सीखे।

मिलना चाहो तो आते क्यों नहीं

हाल-ए -दिल बतलाते क्यों नहीं

प्यार तो तुमसे करते हैं ना

पता है तुम पर मरते हैं ना

पास हमारे आते क्यों नहीं

हाल-ए -दिल बतलाते क्यों नहीं

काट लेंगे यादों के सहारे

खुश रहना मेरे दोसत प्यारे

बनेंगे एक दूजे के सहारे

कभी तो मिल जाएंगे किनारे

माना हम नासमझ हैं थोड़े

तुम हम को समझते क्यों नहीं

दूर रहो जा आओ पास

मत होना तुम कभी उदास

दोस्त हो तुम मेरे ख़ास

फिर मिलने की रखना आस

हम चाहते तुम हक जताओ

अपना हक जताते क्यों नहीं

मिलना चाहो तो आते क्यों नहीं

हाल-ए -दिल बतलाते क्यों नहीं

अपना समझ कर डांट लो बेशक

दुःख सुख हमसे बाँट लो बेशक

साँस लेता हूँ हवा हो तुम

मुझसे कब बोलो जुदा हो तुम

हसना रोना गले लगाकर

गले से तुम लगाते क्यों नहीं

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मिलने को मन करता रोज़

रहती दिल को तेरी खोज

बसे हो दिल में धड़कन जैसे

सामने तुम पर आते क्यों नहीं

शरतें रखकर प्यार नहीं होता

स्कोचने वाला यार नहीं होता

पूरा रख लो आधा रख लो

फैसला कोई सुनाते क्यों नहीं

जाना हो तो जा सकते हो

कभी भी वापस आ सकते हो

चाहिए नहीं जो साथ हमारा

यादों से फिर जाते क्यों नहीं

तुम में हम में फरक क्या है

दूर रहने का तरक क्या है

हमने तुमको अपना माना

तुम हमको अपनाते क्यों नहीं



जिस एक (खुदा ) को सभ एक मानते है

मानते है पर जानते नहीं हैं

उस टुकड़ो में विभाजित हुए एक को

फिर से एक देखने के लिए ही

मैने एक को चुना

अब उसी एक में देखता हूँ पूरी कायनात

उसी एक में वस रही है मेरी सारी ज़िन्दगी

ज़िन्दगी के सभ जज़बात ,सभ दुःख सुख

सभ उमीदें , सभ धड़कने , सभ कल्पनाएं

सभ हकीकतें ,सभ कविताएं सभ कहानीआ

उसी एक के नाम आज के साँस भी ,आज का दिन भी

भले दूर रहे जा पास ,जीवित रहेगा मेरा विशवास

अमरीक बिरहडा


मेरा दोस्त वड़ा निराला है

बड़ा प्यारा भोला भाला है

वोह दूर बैठ के कहता है

आने वाला पल जाने वाला है।

भाषा कोई नई सिखाता है

हमे कुछ समझ ना आता है

आँखों से वोह बातें करता है

ज़ुबान पर उसकी ताला है।

क्या शक्ती उसकी यादों में

शब्दों में हम क्या करें बयान

मुर्दा को जीवित कीया है

जीवित को मार डाला है।

जब जब वोह मुसकाता है

फिर जीने को मन करता है

ताजुब है मुस्कान में उसकी

इतना क्यों उजाला है।

---- अमरीक बिरहडा


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अभी तक तुम्हे सिर्फ इतना जानता हूँ

वहते हुए पानी को देखता हूँ

तो तुम्हे समुंदर मानता हूँ।

पानी तो वहता जाएगा

अपनी मंज़िल की तरफ

एक मैं हूँ जो दिशाहीन

राहों की खाक छानता हूँ।

हिन्दी अनुवाद - Poetry जसवंत ज़फ़र

दिशा को ठीक रखन लई

ते सोहनी चाल रखन लई

मैं तुहानू प्यार करदा हाँ

अपना ख्याल रखन लई



एक वार गले मिलने का मौका दो तो जानो

प्यार में बन्दगी का सरूर क्या है।

जब प्यार कीया है सच्ची लगन से

तो अपनी अलग हस्ती होने का गरूर क्या है।

मुझे तो तुम्हारी डांट भी प्यारी लगती है

सभ कुछ अच्छा लगे जाने प्यार का फितूर क्या है।

दूर रह कर वोह शिकायत करते हैं पास आते नहीं

प्यार और दर्द दोनों ही दते हैं जाने हसीनाओं का दसतूर क्या है।

ना मिलने की शिकायत करते हैं मुझसे

वोह हैं कहाँ बताते ही नहीं ,अब इसमें हमारा कसूर क्या है।

ਸਾਡੇ ਲਈ ਤਿਉਹਾਰਾਂ ਦਾ ਕੀ ਅਰਥ ਹੈ

4 -5 ਭਰੋਸੇਯੋਗ ਦੋਸਤ ਆਸ ਪਾਸ ਹੋਣ

ਤਾਂ ਸਾਡੇ ਲਈ ਰੋਜ਼ ਤਿਉਹਾਰ ਹੈ

ਕੈਨੇਡਾ ਚ ਤਾਂ ਦੋ ਤਿੰਨ ਤਿਉਹਾਰ ਸਰੀ ਚ ਮਨਾਏ ਸਨ

ਉਸ ਤੋਂ ਬਾਅਦ ਤਾਂ ਮੰਦਰ ਗੁਰਦੁਵਾਰੇ ਵੀ ਘਟ ਹੀ ਗਿਆ

5-6 ਸਾਲ ਤਾਂ ਬਿਲਕੁਲ ਹੀ ਗਿਆ ਨਹੀਂ

ਇਹ ਵੈਸੇ ਬਹੁਤ ਮੁਸ਼ਕਿਲ ਹੈ 4 -5 ਬਰੋਸੇਯੋਗ ਦੋਸਤ ਬਣਾਉਣਾ

हमारे लिए त्योहारों के क्या अरथ हैं

4 -5 भरोसेयोग दोस्त आस पास हों

तो हमारे लिए रोज़ तयोहार है

कनाडा में सिर्फ एक दो तयोहार Surrey में मनाए थे

उसके बाद तो मंदिर गुरदुआरे बहुत कम गया था अभी तक

4 -5 साल तो बिलकुल ही नहीं गया

अब मैं पैसे नहीं गिनता समय का हिसाब करता हूँ

शहर के पहले चकर का हिसाब

45 मिनट कॉफी पीने में

काफ़ी पीते पीते Music Book पड़ता हूँ

45 मिनट भगवान के घर में गुज़रे

आज मैने भगवान से झगड़ा नहीं कीया

Decade में पहली वार लंगर खाया

अभी बारिश हो जा Snow

2 घण्टे बचे हैं शहर में घूमने को

अभी तक किसी ने साथ चलने की सहमति नहीं दी

ना घर वालों ने, न दोस्तों ने

मुझे अकेले जाना हो तो Post करने की अवशकता ही क्या ?

जब चाहूँ चला जाऊं एक दिन में तो 2-3 वार जाता हूँ

सभ के सभ नौकरी और व्योपार में मस्त हैं

अभी भी 2 घण्टे को Window है चलना तो चलो

एक इनसान Street Light के नीचे कुछ ढूंढ रहा था

पास से गुज़रता हुआ एक यात्री पूछने लगा क्या ढूंढ रहे हो ?

मैं कुछ मदद करूँ ?

वोह इनसान बोला परस गम गया है वोह ढूढ़ रहा हूँ

यात्री ने पुछा खोया कहाँ था बोला जहाँ से लगभग किलोमीटर दूर

यात्री ने पुछा यहाँ क्यों ढूढ़ रहे हो ?

वोह बोला जहाँ खोया है वहां अँधेरा है

इसी लिए street लाइट के नीचे ढूंढ रहा हूँ

अब बताओ जहाँ कुछ खोया है बन्दा वोही पे ढूंढता है।



ज़िंदगी के लक्ष्य तुम बिन हैं अर्थहीन

रोज़ाना कोशिश करता हूँ तुम्हे ढूढ़ने की

इतना तो होगा आपको भी यकीन

आप साथ हो तो सौ दुखों में आनन्द का अनुभव

बिन आपके कुछ नहीं लगता हसीन

काश आप मेरे कदम से कदम मिलाओ

Black & White है जो आजकल ज़िन्दगी फिर से लगे रंगीन

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अपने दोषी पर रहम कीजिए

छोड़िएगा मत इसको

उम्र कैद की सज़ा दीजिए

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जब भी तेरा दीदार होवेगा

झल दिल का बीमार होवेगा

किसी भी जनम आकर देख लेना

तुम्हारा ही इंतज़ार होवेगा

आज पिआनो Backyard में ही ले जानी है

-- शिव कुमार बटालवी ਸ਼ਿਵ ਕੁਮਾਰ ਬਟਾਲਵੀ


कहाँ हो तुम मुझे पता भी तो नहीं

जुदा तो दुनिया ने कीया है हम दोनों को

हमारी तुम्हारी ख़ता भी तो नहीं

ना चिहरा देखा ना आवाज़ ही सुनी

हमें अब कुछ भाता भी तो नहीं

दिमाग पहले से बन्द था

अब आँखें और कान भी हड़ताल पर हैं

अब तो रोज़ गाता भी तो नहीं

चले आओ यार तुम खुद ही

हमें इंतज़ार के इलावा कुछ आता भी तो नहीं

-- बिरहड़ा

लाला जी लाला जी कैसे हैं गोपाला जी

गुस्सा अपना छोड़ दीजिए क्र दीजिए ज़रा उजाला जी

आईए बैठ परवार के साथ पीजिए चाय का प्याला जी

कयों करते हो इतना संदेह सीधे साधे बन्दे पर

साफ़ हूँ दिल से हिस्टरी देखो कीया ना कोई घोटाला जी

कयों पूजें पथर की मूरत इनसान में रब्ब है अगर

जीते जागते धड़कते दिल को बना दें नया शिवाला जी


मेरे पीछे पीछे आ जाते, तो दरिया किनारे हम जाते

पतझड़ के कुछ रंग सुनहरी वहता पानी दिखलाते

साथ में होते उड़ते पंछी , ताज़ी हवा पेड़ ख़ुशी में लहराते

तैरते हुए दरिया में कुछ Mallard ducks

मस्ती करते डुबकी मार के नहलाते

प्यार का मौसम ,सकूंन रूह का साथ में होते

सभ कुछ हसीन हो जाता ,सभ मौसम आते जाते

इक मुण्डा जिहदा नाम बिरहड़ा

गुम है गुम है गुम है

सीधा साधा पगला कहीं का

गुम है गुम है गुम है

सूरत से वोह मजनू लगदा

सीरत से वोह शायर लगदा

मधरा कद का नैन सुनखे

मुस्काये तो वाहला फबदा

छोड़ कर सारे काम झमेले

पता नहीं किसको रहन्दा लभदा

गुम हुए दो साल ने हो गए

पहलों किहड़ा होश च सी वोह

इक्क्ले बैठ के कभी है रोता

कभी यह हसदा भंगड़ा पाउँदा

हसदा ए तां सारे ही हसदे

रोंदा है तो बेबी लगदा

उएन उएन उएन

मंने ना खानी रोटी पहले मेरे दोस्त को लेकर आओ

अमरीक तुम्हारा problem कया है चलो चुप चाप रोटी खाओ

ठीक है जी खा लेता हूँ आप please गुस्सा मत होना

मेरे दिल में दर्द होता है

तो मैं क्या करूँ

आपने यही बात थोड़ा कोमल अंदाज़ में बोली होती

हम आपकी कोई सहायता करें - ऐसा बोलते तो कितना musical होता

मैं बोलता Please कीजिये ना सहायता

अमरीक इतना नौटँकी काहे को करता है बाबा

उएन उएन उएन

मेरे को नौटँकी बोला जा मंने ना करनी तुमसे बात

अरे यार रूको गुस्से में बोल दिए बाबा

Please मेरे से बात कीजिये ना - मुस्कुरा देता हूँ हाँ

ज़मीं पे ढूंढता हूँ आसमां पे ढूढ़ता हूँ

चारों दिशाओं में जाता हूँ मैं

तुम्हे मैं पूरे जहाँ में ढूढ़ता हूँ।

चाँद पे जाता हूँ , मंगल पे जाता हूँ

जाने तुम्हे कहाँ कहाँ ढूढ़ता हूँ।

सरदी हो तो धुप में ढूढंता हूँ

गर्मी हो तो जाकर छाँव में ढूढंता हूँ।

बैठे हो तुम मेरे दिल में बस कर

जाने तुम्हे क्यों जहाँ वहाँ ढूढंता हूँ।

--- अमरीक बिरहड़ा

बुधु कह लो , कमअकल कह लो

और जो भी मन में आए कह लो

बस बेवफ़ा मत कहना


दोसतो आज धयान लगाने की बात करते हैं।

बहुत मुश्किल काम है धयान लगाना पर फ़ायदा क्या पहले यह बात करते हैं।

ज़िन्दगी के सारे दुःख सुख दिमाग में चल रहे विचारों से ही होते है।

सुख में तो कोई चक्क्र नहीं पड़ता पर दुःख समय यह जानना बहुत जरूरी है

कि दुःख अपने आप में इतना वड़ा नहीं होता जितना दिमाग में चल रहे विचार बना देते हैं।

तो अैसे में धयान लगाने का फ़ायदा यह कि विचारों की श्रृंखला टूट जाती है

धयान दुनिआ भर की मुसीबतें भूल क्र एक बिंदू पर केंद्रित हो जाता है।

कहने का तातपर्य कोई एक विचार पूरी तरह से दिमाग को घेर लेता है।

अैसा करने के लिए कोई भगवान के नाम का सहारा लेता है।

कोई किसी भी शब्द का जा कोई भी जुगत लगाता है

मैं खुद एक दोसत की तसवीर पर धयान लगाता हूँ

जब अैसा करता हूँ सभ कुछ भूल क्र बीएस वोह दोसत याद रहता है .

अैसा करने से मुझे सकूंन मिलता है , मुझे तो लगता है दोस्त को भी मिलता होगा।

दुनिआ की उलझने उस वक्त प्रभावित नहीं करती। और कुछ दिखाई जा सुनाई भी नहीं देता।

बस अपने अपने तरीके हैं धयान लगाने के।

पर एक बात है समय का कोई track नहीं रहता।

समय की dimensions से बाहर चला जाता है इनसान।

दुनयावी चीजें पानी हो तो समय के अंदर रहना बहुत जरूरी है।

जा फिर धयान लगाने का समय निसचित कर लें।

जब कोई कष्ट जा दर्द महसूस हो तब ध्यान लगाएं।

बाकी समय अपने दुनयावी goal पूरा करने पर लगाएं।


तुम ही मेरी कविता हो

तुमने मुझे भावनाओं को वयक्त करना सिखाया

तुम ही मेरी प्रेरणा हो

तुमने मुझे कुछ सीखने को प्रेरित कीया

तुम ही मेरी कलपना हो

तुमने मुझे सपने देखना सिखाया

(visualize, Imagine करना सिखाया )

तुम ही मेरी उपासना हो

तुम्हारा ही धयान लगाता हूँ

तुम ही मेरी आराधना हो

तुम्हारा ही पूजन करता हूँ

तुम ही मेरी साधना हो

तुम्हारा ही एहसास रहता है

तुम ही मेरी संवेदना हो

तुम्हारी सहानुभूति से जीता हूँ

तुम ही मेरी आशा हो

तुम्हारी वजह से ही आशावान हूँ

----- अमरीक बिरहड़ा


जब तक दिल समझा नहीं लेते

तुम हमको अपना नहीं लेते

रोज़ यादों में आऊंगा

रोज़ ख़ाबों में आऊंगा

अब तुम ही मिलने की कोशिश करना

मैं उसमे कदम मिलाऊँगा

----- अमरीक बिरहड़ा

दरिया किनारे बैठा

बहते हुए पानी को देख रहा था

तो महसूस कीया

पानी तो हर पल बढ़ रहा है

अपनी मज़िल की तरफ़

कभी तो जा मिलेगा समुंदर से

पर मेरी मज़िल कहाँ है

मुझे तो कोई ज्ञान ही नहीं

कितने दिन यही शबद वार वार बोलता रहा

जब भी दरिया किनारे जाता

एक दिन अंदर से आवाज़ आई

पगले तेरी मंज़िल तेरी धड़कन में समा गई है

महसूस करो उसे दिल की हर धड़कन में

आती जाती हर सांस में

बाहर कब तक ढूढ़ते रहोगे

समा जाओ इसी एहसास में

के तुम और मज़िल अब दो नहीं एक ही हो